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शास्त्रों से जानें, व्रत व त्योहारों में आखिर क्यों किया जाता है पेड़-पौधे का पूजन

 हम सभी जानते हैं कि हमारी प्रकृति के लिए पेड़ पौधे कितना ज्यादा मायने रखते हैं, वहीं आपको बता दें कि बिना इनके मानव जीवन की कल्पना अधूरी है। जल, वायु और वृक्ष आदि हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। इनके संरक्षण समृद्धि पर हर एक व्यक्ति को ध्यान देना चाहिए। जीवन की समृद्धि खुशहाली के लिए वृक्ष और हरियाली बहुत महत्वपूर्ण है। वायु, जल और वृक्ष जीवन की महत्ती आवश्यकता है।

कहा जाता है पद्मपुराण के सृष्टि खंड में विभिन्न वृक्ष लगाने से विभिन्न लाभ अंकित किए हैं। हमारी भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि वृक्ष हैं। हमारी संस्कृति में वृक्षों की विभिन्न अवसरों पर विभिन्न रूपों में पूजा भी की जाती है क्योंकि वृक्ष देव रूप हैं और इनमें देवताओं का वास माना गया है, इसलिए भारतीय संस्कृति से ऐसे पर्व, व्रत व त्यौहार विशिष्ट तिथियों को आते हैं जिनमें किन्हीं खास पौधों या वृक्ष को पूजा जाता है।

सभी तरह के वृक्षों में पीपल ही एकमात्र ऐसा वृक्ष है, जिसमें कभी कोई कीड़े नहीं लगते। यही कारण है कि हिंदू धर्म में पीपल का पेड़ काटा जाना वर्जित माना गया है। पीपल के वृक्ष में अनेक देवी-देवताओं का वास माना गया है, इसीलिए यह देव वृक्षों की श्रेणी में आता है।

वटवृक्ष (बरगद) भी पूज्य है। वटवृक्ष के नीचे ही भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी इसीलिए इसे बोधिवृक्ष भी कहते हैं। वटवृक्ष के नीचे ही सावित्री ने सत्यवान को यमराज के पाश से मुक्त कराया था। इसीलिए वट सावित्री व्रत में इसी वटवृक्ष की पूजा, सुहागिन महिलाएं करती हैं और अपने पति के दीर्घायु, स्वास्थ्य की कामनाएं करती हैं।

अशोक वृक्ष के बारे में कहा गया है कि शोक निवारे सो अशोक। इस वृक्ष का महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि माता सीता ने अपने सबसे कष्टमय व दुखद पल (यानी रावण के यहां) स्वर्ण नगरी में अशोक वाटिका को ही अपना आश्रय स्थल बनाया था और अशोक वृक्ष के नीचे ही रहकर उन्होंने अपना संपूर्ण समय बिताया था। मान्यता है कि जिस घर में अशोक का वृक्ष लगा होता है वहां वास्तुदोष भी नहीं रहता है।

नीम वृक्ष बहुत ही उपयोगी है। इसकी पत्तियां कड़वी जरूर होती हैं लेकिन कई तरह से चिकित्सा में बहुत उपयोगी होती है क्योंकि इसकी पत्तियों में रोगाणुओं को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है। इस वृक्ष को शीतला माता व मां दुर्गा का वृक्ष माना गया है।

बिल्व वृक्ष से सभी परिचित हैं। बिल्व पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं। बिल्व पत्र की महिमा का बखान करने वाला ‘बिल्वाष्टकम्’ स्तोत्र भी है, जिसमें इसके आध्यात्मिक गुणों का वर्णन है। बिल्व वृक्ष में लगने वाला बेल का फल भी पेट संबंधी रोगों के निवारण में बहुत उपयोगी है।

आम का पेड़ सभी को अत्यंत प्रिय है। फलों का राजा आम को कहा जाता है। मांगलिक कार्यों में, कलश स्थापन में, वंदनवार बनाने में आम्रपत्तियों का उपयोग होता है। आम की लकड़ी का प्रयोग भी हवन आदि में होता हैं। जब आम के वृक्षों में बौर आ जाते हैं तो उनकी मनमोहक खुशबू से वातावरण महक उठता है और फिर कोयल भी कूकने से अपने आपको रोक नहीं पाती।