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कैंसर के बारे में ये बातें हैं एकदम झूठ, आपको पता होने चाहिए ये मिथ

 भारत में हृदय रोग के बाद सबसे ज्यादा मौतें कैंसर की वजह से होती हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के अनुसार, देश में कैंसर काफी लोगों में फ़ैल चुका है और जिस तरह से जीवन प्रत्याशा दर और लोगों की जीवनशैली में परिवर्तन आ रहा है उसे देखते हुए इसके बढ़ने के आसार काफी ज्यादा हो चुके हैं. कैंसर को लेकर ज़्यादातर लोगों के मन में एक डर बैठ चुका है लेकिन इसके साथ ही इस बीमारी को लेकर लोगों में काफी भ्रम और मिथक भी हैं जिसे कि दूर होना चाहिए. आइए जानते हैं इन मिथकों के बारे में…

मिथक 1: कैंसर एक संक्रामक यानी कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है

– कैंसर वास्तविकता में संक्रामक नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में वायरस के इन्फेक्शन की वजह से कैंसर के मामले सामने आए हैं. इनमें से कुछ में ह्यूमन पैपिलोमावायरस वायरस शामिल है जो सेक्सुअल ट्रांसमिशन के जरिए गर्भाशय के कैंसर का कारण बन सकता है, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी जो सेक्सुअल ट्रांसमिशन के माध्यम से लिवर (यकृत) कैंसर या संक्रमित सुई और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया की वजह से फैलता है. यह पेट के कैंसर का कारण बनता है. यह बैक्टीरिया आपके पाचन तरंत को प्रभावित करते हैं.
मिथक 2: अगर आपके परिवार में बड़े-बुजुर्गों को कैंसर की बीमारी हो चुकी है इसका मतलब है कि आपको भी ये बीमारी होगीयह बात सच है कि अगर आपके परिवार में किसी को कैंसर की बीमारी हो चुकी है तो आपको भी इस बीमारी का खतरा रहता है, लेकिन ऐसा होगा ही यह बात निश्चित नहीं है .केवल 5 से 10 फीसदी मामले ही ऐसे सामने आए हैं जब म्यूटेशन की वजह से लोगों को कैंसर हुआ है. म्यूटेशन को सीधे तौर पर समझे तो माता पिता के गुणसूत्र से बच्चों को कैंसर की बीमारी अनुवांशिक तौर पर मिली है. ठीक इसी तरह ऐसा भी नहीं है कि अगर आपके परिवार में किसी भी व्यक्ति को कैंसर की बीमारी नहीं है तो ऐसा जरूरी नहीं है आपको भी कैंसर न हो. उम्र के कई पड़ावों में आपके अनुरूनी अंगों में कई तरह के जेनेटिक बदलाव जैसे कि तनाव और स्मोकिंग की वजह से कई बार कैंसर हो सकता है.

मिथक 3: एक निर्धारित उम्र के बाद कैंसर का इलाज संभव नहीं है

– कैंसर का इलाज कराने के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है और हर उम्र में इस बीमारी का इलाज असंभव है. हां इलाज के दौरान इस बात का फर्क जरूर पड़ सकता है कि कम उम्र वालों की इम्युनिटी और बॉडी ज्यादा स्ट्रांग होने की वजह से वो जल्दी रिकवर हो पाते हैं वहीं बड़ी उम्र के लोगों को इसमें वक्त लगता है.मिथक 4: कैंसर के मरीज सामान्य जीवन नहीं जी सकते

– कैंसर के रोगियों को उपचार के दौरान और बाद में भी हेल्दी जीवन शैली का पालन करना चाहिए ताकि आगे जाकर उन्हें रोग की वजह से कोई दूसरी दिक्कत सामने ना आए और वो अपनी रूटीन लाइफ को जारी रख सकें. ट्रीटमेंट के दौरान भी जो कैंसर पेशेंट्स ऑफिस गोइंग हैं वो कम पर जा सकते हैं.

(कैंसर से जुड़े ये मिथक डॉक्टर तेजेंद्र कटारिया जोकि मेदंता, कैंसर इंस्टिट्यूट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के चेयरपर्सन हैं के News18 english से बातचीत के आधार पर हैं)