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क्या आप कभी-कभी खुद से बातें करते हैं, तो यह जानकारी सिर्फ आपके लिए

 


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अमेरिका की मनोचिकित्सक डॉक्टर “लौरा डबनी” का मानना है कि खुद से बात करना कोई मानसिक बीमारी नहीं है हम सब कभी ना कभी खुद से बातें करते हैं लेकिन जब हम जोर-जोर से खुद से बातें करते हैं तो लोगों को अजी महसूस हो सकता है हम सभी कुछ से मन ही मन बातें करते हैं उदाहरण के लिए जैसे सुबह काम पर जाने से पहले, चाबी, टिफिन, पर्स, घड़ी, पेन आदि रख लिया है या नहीं जब आप ऑफिस से लौटते समय बॉस की चिक चिक को याद नहीं करते इसलिए प्रत्येक व्यक्ति मन ही मन बात करता है लेकिन जब हम जोर से स्वयं से बात करने लगते हैं तो लोगों को आज ही लगता है।

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- खुद से बात करने की आदत हमको हेल्दी और मददगार भी होती है बुरे वक्त में हम सबसे ज्यादा खुद से बातें करने लगते हैं और खुद को मोटिवेट करने की कोशिश करते हैं।
- रोज की समस्याओं से निपटने के लिए लोग खुद से बातें करते हैं और हल प्राप्त होता है।

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जब आप किसी बात को लेकर नर्वस हो रहे हैं एक रिसर्च में सामने आया है कि इस वक्त मैं खुद से बात करना नर्वसनेस को गायब कर देता है।
- खुद से बात करने की आदत कोई बीमारी नहीं है बल्कि इससे तनाव दूर होता है।