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कहीं आप भी तो नहीं कर रहे राक्षसी स्नान, बदल लें आदत

 हमारी संस्कृति में स्नान करना बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। स्नान करने से मनुष्य पवित्र हो जाता है और उसकी नकारात्मक ऊर्जा भी खत्म हो जाती हैं। स्नान करने से शरीर पर जमी गंदगी साफ हो जाती है और शरीर स्वस्थ हो जाता है। ज्यादातर व्यक्ति प्रतिदिन स्नान करते हैं और स्नान करने से हमें ताजगी भी महसूस होती है।


 
लेकिन स्नान किस समय किया जाता है, ये भी बहुत महत्वपूर्ण है। अलग-अलग समय पर स्नान करने का हमें अलग-अलग फल मिलता है। हमारे शास्त्रों में स्नान को चार भागों में बाटा गया है, जिनके नाम क्रमशः मुनि स्नान, देव स्नान, मानव स्नान और राक्षस स्नान हैं। स्नान करने के समय के आधार पर स्नान को इन चार भागों में बाटा गया है।
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1.जो व्यक्ति सूर्योदय से पहले ही स्नान करता है, वो मुनि स्नान कहलाता है और ऐसे लोगों के घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।
2.जो व्यक्ति सूर्योदय के समय स्नान करता है, उसे देव स्नान कहते हैं।
3.जो व्यक्ति सूर्य उगने के पश्चात स्नान करता है, ऐसा स्नान मानव स्नान कहलाता है।
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4.ऐसा व्यक्ति जो सूर्य निकलने के बहुत समय बाद स्नान करता है, तो ऐसा स्नान राक्षसी स्नान कहलाता है और शास्त्रों में राक्षसी स्नान को बहुत बड़ा पाप माना गया है। इससे जीवन में कई परेशानियों का आगमन होता है।