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इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल करने वाले 99% लोग नही जानते ये सच्चाई

 




आज के इस बदलते युग में लोग इंडियन टॉयलेट सिस्टम की बजाय वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जिनके पैरों में और घुटनों पर बैठने में समस्या होती है लेकिन कम उम्र में वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल शरीर के लिए ठीक नहीं होता है। जब युवा कम उम्र में नीचे बैठना छोड़ देंगे तो आगे चलकर अपने घुटनों और जोड़ों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आज की पोस्ट में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम की बजाय इंडियन टॉयलेट सिस्टम बेहतर क्यों है।

पेट होता है अच्छे से साफ



इंडियन टॉयलेट बैठने से हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है, इससे आपके पेट पर दबाव भी पड़ता है, जिस वजह से आपका पेट अच्छी तरह से साफ हो जाता है, वहीं दूसरी ओर जब व्यक्ति वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम का इस्तेमाल करता है, इस दौरान व्यक्ति के पेट पर दबाव नहीं पड़ता है, जिस वजह से पेट सही तरीके से साफ़ नहीं हो पाता है, जिससे व्यक्ति को कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं होने लगती है।

होता है अधिक साफ



जो लोग वेस्टर्न टॉयलेट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं वे लोग साबुन से हाथ धोने की बजाएं टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके हाथ पर बैक्टीरिया होने का खतरा मौजूद होता है। वहीं जो लोग इंडियन टॉयलेट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं वे लोग अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोते हैं जिस वजह से उनका हाथ साफ रहता है।

शारीरिक एक्सरसाइज होती है



टॉयलेट करते समय आपको उठना-बैठना पड़ता है, इस दौरान हाथों और पैरों का इस्तेमाल होता है। लगातार उठने-बैठने से आपकी पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत होती है।