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पीरियड्स रोकने के लिए खाती है दवा तो हो जाए सावधान, होते हैं ये 5 बड़े नुकसान

 आज हम आपको महिलाओं के पीरियड्स से संबंधित कुछ खास जानकारियां देने वाले हैं| हर महिलाओं को प्रतिमाह पीरियड्स के दर्द से गुजरना पड़ता है| पीरियड्स के दौरान महिलाओं को दर्द चिड़चिड़ापन एवं कमजोरी महसूस होती है| इसके साथ ही महिलाएं दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाओं का सेवन भी करती है| कई बार किसी फंक्शन को अटेंड करने के लिए पीरियड्स की डेट को दवाओं के सहारे से आगे बढ़ा दिया जाता है| जो महिलाएं पीरियड्स से संबंधित दवाओं का सेवन करती रहती है उन महिलाओं के शरीर को काफी नुकसान पहुंच सकता है|



पीरियड्स आने का सही समय



वैसे तो आमतौर पर पीरियड्स सर्कल 24 दिनों का होता है| इसके अलावा माना जाता है कि 28 से 38 दिनों के बीच में भी पीरियड्स होते हैं तो वह नॉर्मल है| अगर किसी महिला को हर बार लेट पीरियड्स आते हैं, तो उन्हें डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए|

पीरियड्स रोकने वाली दवाओं के साइड इफैक्ट्स

अनियमित पीरियड्स

अगर आप एक महिला है और अपने पीरियड्स की डेट को आगे बढ़ाने की दवाओं का सेवन करती है, तो इससे आपको अनियमित पीरियड्स की समस्या उत्पन्न हो सकती है| इससे 28 से 30 दिनों का पीरियड्स चक्र बिगड़ता है, तो ओव्यूलेशन में गड़बड़ हो जाती है जिससे महिलाओं के प्रजनन प्रणाली प्रभावित होती है|


हेवी ब्लीडिंग

जो महिलाएं नियमित रूप से पीरियड्स के दर्द को रोकने की दवाओं का सेवन करती है या पीरियड्स की डेट को आगे बढ़ाने के लिए दवाओं का सेवन करती हैं, उन महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग होने का खतरा काफी बढ़ जाता है| इस वजह से असहनीय दर्द होना भी संभव है|

मोटापा और डायबिटीज

जिन महिलाओं की उम्र 30 साल से ज्यादा है, इसके साथ ही मोटापे या डायबिटीज की बीमारियों की शिकार है तो इन महिलाओं को पीरियड्स के दर्द को रोकने की दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए| यह दवाइयां इन बीमारियों को बढ़ाने का कार्य करती है|


उल्टी दस्त की समस्या

पीरियड्स के दिनों में इन दवाओं का सेवन करने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती है जैसे की उल्टी, दस्त, पेट में गड़बड़ इत्यादि| इसके साथ ही अनियमित पीरियड्स के वजह से शरीर में कमजोरी और चक्कर आने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है|

हार्मोन में असंतुलन होने का खतरा

पीरियड्स के दिनों में दवाओं का सेवन करने से महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन हो जाते हैं, जिसकी वजह से हारमोंस का संतुलन बिगड़ जाता है| ऐसी स्थिति में कई बार पीरियड्स 2 महीने से ज्यादा समय के बाद आना शुरू होते हैं| इसलिए कोशिश करें कि इन दवाओं का सेवन ना करें|