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कश्मीर में सेना की अनोखी पहल, इनकाउंटर से पहले देंगे आतंकियों को सुधरने का आखरी मौका


कश्मीर घाटी में आतंकियो के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान आतंकी गुटों में नए-नए भर्ती हुए कम उम्र के स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बल एक मौका दे रहे हैं। करीब आधा दर्जन ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बल कर्मी 20-25 किलोमीटर दूर से आतंकी के परिजनों, उनके माता - पिता को लेकर आये। जिससे वे अपील करें कि अगर आतंकी बना युवा वापस आना चाहता है तो आ जाये। पुलिस भरोसा देती है कि घर वाले उसे लेकर जा सकते हैं पुलिस उसके खिलाफ कुछ नही करेगी।

अंतिम विकल्प के तौर पर कार्रवाई
डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया ज्यादातर मामलों में मुठभेड़ वाली जगह से आतंकी वापस नहीं आए क्योंकि उनके साथ मौजूद पुराने आतंकी उन्हें ऐसा नहीं करने देते। या फिर उन्हें डर होता है कि बाद में आतंकी उसको और उसके परिवार वालों को मारेंगे। सुरक्षा बल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हम परिवार वालों का भरोसा जीतने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें बताते हैं कि हमें इनकाउंटर का शौक नहीं है। हम घर वालों को सुरक्षित बंकर में मुठभेड़ वाली जगह पर लेकर जाते हैं। उन्हें पूरा मौका देते हैं। जब आतंकी नही मानता, तो अंतिम विकल्प के तौर पर कार्रवाई होती है।

रिश्तेदारों को करते हैं आतंकी फोन
पूछे जाने पर कि कैसे पता चलता है कि अंदर कोई स्थानीय युवा आतंकी है, अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ से पहले आतंकी अपने घर या रिश्तेदारी या किसी खास को फोन जरूर करता है। अलग अलग स्रोत से पुलिस जानकारी जुटाती है और जानकारी पुख्ता होने पर परिजनों को लाया जाता है।