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PM मोदी के आत्मनिर्भर भारत पर कौशल विकास मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय का बड़ा बयान


मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू हुए लॉकडाउन की वजह से देश में बंटवारे के बाद से सबसे बड़ा पलायन हुआ। काम के अभाव में करोड़ों श्रमिक शहरों से गांव लौट गए। अब सरकार के सामने उन्हें गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती है। उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल का प्रशिक्षण देना होगा। इस बारे में अमर उजाला के शरद गुप्ता  ने केंद्रीय कौशल विकास मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय से बात की। पेश हैं मुख्य अंश...

लॉकडाउन के दौरान करोड़ों श्रमिक शहरों से गांव चले गए हैं। वहां उनके पास रोजगार नहीं है। क्या उनके लिए कुछ सोच रहे हैं?
सरकार ने इस बारे में एक एंपावर्ड ग्रुप बनाया है। जिन जिलों में25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिक पहुंचे हैं उन पर हमारा अधिक ध्यान है। छह प्रदेशों के 116 जिले चिह्नित किए गए हैं। इनमें 31 यूपी और 32 जिले बिहार के हैं, 24 मध्य प्रदेश और 22 राजस्थान व चार-चार जिले प. बंगाल और ओडिशा के हैं। उन्हें 25 प्रकार के कामों का हमारे मंत्रालय की ही जिम्मेदारी है।


क्या प्रशिक्षण का काम शुरू हो चुका है?
हम राज्य सरकारों से तालमेल कर तैयारी पूरी कर चुके हैं। मुख्यमंत्रियों से लेकर सचिवों तक से संपर्क हो चुका है। नोडल अफसर नियुक्त हो चुके हैं। प्रशिक्षक और प्रशिक्षु चिह्नित किए जा चुके हैं। जैसे ही कोरोना का प्रकोप कम होगा, कार्यशालाएं शुरू हो जाएंगी। जैसे-जैसे गृहमंत्रालय अनुमति देगा हमारा काम बढ़ता जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा?
यह महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज योजना और प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देगा। इससे पलायन रुकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त बनेगी। कोरोना के दौरान भी जब शहरों के मॉल बंद थे तो सारा सामान गांव की तर्ज पर चल रही एकल दुकानों ने ही उपलब्ध कराया।