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गहलोत सरकार का एक और मास्टर स्ट्रोक, राजस्थान में CBI को नहीं मिलेगी डायरेक्ट एंट्री


राजस्थान में चले रहे सत्ता संघर्ष के बिच प्रदेश की गहलोत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. कथित ऑडियो टेप मामले में बीजेपी द्वारा सीबीआई जाँच की मांग के बाद राज्य और केंद्र में संभावित टकराव को देखते हुए राज्य सरकार ने सीबीआई जांच (CBI Investigation) को लेकर बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के बाद अब राजस्थान में सीबीआई सीधे तौर पर किसी भी मामले में जांच नहीं कर पाएगी. सीबीआई को जांच करने से पहले राज्य सरकार की सहमती लेनी होगी. सहमति मिलने के बाद ही सीबीआई राजस्थान में किसी मामले की तहकीकात कर पाएगी. इस बाबत राज्य के गृह विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है.
अधिसूचना में क्या कहा गया है?
रविवार को राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीबीआई सीधे किसी भी तरह के केस की जांच नहीं कर पाएगी. अधिसूचना में कहा गया है कि यदि सीबीआई के पास 1990 से पहले का कोई केस यदि हो, तो उसे राज्य सरकार से इस मामले में सहमति लेनी होगी.
पहले भी कई राज्य लगा चुके है CBI की एंट्री पर रोक
राज्य में सीबीआई की एंट्री पर रोक लगाने वाला राजस्थान पहला राज्य नहीं है. इससे पहले छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सीबीआई के राज्य में किसी भी मामले में सीधी जांच पर रोक लगाई थी. यानी इन राज्यों में अगर किसी मामले में सीबीआई को जांच करनी है तो पहले राज्य सरकार से सहमती लेनी होगी. बिना सहमती के इन राज्यों के किसी भी मामले में सीबीआई जांच नहीं कर पायेगी.
गौर करने वाली बात यह है कि राजस्थान में सीबीआई को लेकर यह फैसला तब लिया गया है. जब कुछ ही दिनों पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. सीएम गहलोत ने कहा था कि आज देश में गुंडागर्दी हो रही है, मनमर्जी के हिसाब से छापे मारे जा रहे हैं. मुझे दो दिन पहले ही पता लग गया था कि मेरे करीबियों के छापे पड़ेंगे.
मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य में जारी सियासी उठापटक के बिच उनके करीबियों पर हुए इनकम टैक्स के रेड को लेकर था. बता दें कि राजस्थान कांग्रेस के दो बडे़ नेताओं और सीएम गहलोत के करीबी कहे जाने वाले राजीव अरोड़ा और धर्मेंद्र राठौड़ के ठिकानों पर बीतें दिनों आयकर विभाग की कई टीमों ने दिल्ली से लेकर जयपुर तक छापेमारी की थी.