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क्या बंद कमरों में भी हो सकता है कोरोना संक्रमण का खतरा? जानें इस रिपोर्ट में


कोरोना वायरस बंद कमरों में किन-किन चीजों से फैल सकता है? महामारी के बीच क्या किसी बंद स्टेडियम में मनोरंजन गतिविधियों का आयोजन सुरक्षित है? जर्मन शोधकर्ता इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए एक लाइव म्यूजिक कंसर्ट के आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। 

22 अगस्त को लेपजिग एक बंद स्टेडियम में प्रस्तावित कंसर्ट में मशहूर गायक टिम बेंद्जको के सुरों की महफिल सजेगी। मार्टिन लूथर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता कंसर्ट में शामिल श्रोताओं की मदद से यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि वे सबसे ज्यादा किन क्षेत्रों में जाते हैं और किन चीजों को छूते हैं। इससे वायरस के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील सतहों की समझ हासिल करने में मदद मिलेगी। 
पल-पल की लोकेशन पर रखेंगे नजर-
-डॉ. स्टीफन मॉरित्ज के नेतृत्व में होने वाले इस अध्ययन में सभी प्रतिभागियों के गले में अत्याधुनिक सेंसर से लैस एक नेकलेस पहनाया जाएगा। यह नेकलेस हर पांच सेकेंड पर प्रतिभागियों की लोकेशन के साथ यह भी बताएगा कि वे औरों के कितने करीब रहते हैं।
सबसे ज्यादा छुई जाने वाली सतह पहचानेंगे-
-प्रतिभागियों के हाथ में ‘फ्लूरोसेंट सैनेटाइजर’ लगाया जाएगा। इससे वे जिस भी सतह को छुएंगे, वो कंप्यूटर स्क्रीन पर दमकती नजर आएगी। सार्स-कोव-2 वायरस फैलाने में ‌एयरोसोल (नाक-मुंह से निकलने वाली पानी की सूक्ष्म बूंदें) क्या भूमिका निभाती है, इसकी जांच के लिए फॉग मशीन का सहारा लिया जाएगा।
अध्ययन से 48 घंटे पहले होगी जांच-
-मॉरित्ज के मुताबिक ‘रिस्टार्ट-19 प्रोजेक्ट’ के तहत होने वाले इस अध्ययन में 18 से 50 साल के चार हजार प्रतिभागी शामिल किए जाएंगे। कंसर्ट में शिरकत करने से 48 घंटे पहले सभी प्रतिभागियों की कोरोना जांच की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आना जरूरी होगा।