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कोरोना के कारण पाई-पाई को मोहताज आम आदमी, आखिर इनके लिए कब जागेगी मोदी सरकार?


देश में कोरोना महामारी ने कम आय वर्ग के लोगों की कमाई घटाने के साथ ही उन पर कर्ज का बोझ लाद दिया है। करीब तीन चौथाई लोगों की या तो नौकरी चली गई या रोजगार छिन गया है। 40 फीसदी परिवारों को कर्ज लेना पड़ रहा है। वहीं, दो तिहाई लोग काम की तलाश में घर नहीं छोड़ना चाहते हैं। सरकारी मदद मिल रही है, लेकिन वो इतनी नहीं की जरूरतें पूरी कर पाए।

ग्लोबल कंस्लटिंग कंपनी डालबर्ग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। देशभर में 5 अप्रैल से 3 जून के बीच करीब 47 हजार लोगों से राय ली गई। लोगों ने बताया कि मार्च के बाद आमदनी 60% तक घटी है। मार्च में जो लोग 10 हजार रुपए कमा पाते थे वो अप्रैल और मई में 4 से साढे 4 हजार कमा पा रहे हैं। 23 फीसदी परिवारों को मई महीने के दौरान कोई आय ही नहीं हुई। 
लॉकडाउन से कमाई घटी तो देश की टॉप 27 ...

संकट की घड़ी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली बड़ा सहारा बनी। अप्रैल में 50% परिवारों तक जबकि जून में 91 पर्सेंट लोगों को मुफ्त राशन मिलने लगा था। कैश ट्रांसफर की रकम भी खाते में पहुंचने लगी। कुल मिलाकर 84 पर्सेंट लोग सरकारी प्रयासों से संतुष्ट दिखे। 
देश के कुल 16 राज्यों में हुए सर्वे में कोरोना के बाद से हालात पर लोगों की मिलीजुली राय रही। बिहार में 32% यूपी में 19, झारखंड में 22, हरियाणा में 25 फीसदी लोग शहर लौटना चाहते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि नौकरी या काम-धंधा अगले दो महीने तक शुरू नहीं कर पाएंगे। केरल, ओडिशा के लोग मानते हैं कि उन्हें पुरानी नौकरी मिल जाएगी।