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बड़ा खुलासा: कोरोना संकट के इस दौर में धड़ल्ले हो रही है प्लाज्मा की ब्लैक-मार्केटिंग


प्लाज्मा थेरेपी, हालांकि चमत्कारी गोली नहीं है, लेकिन कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए पूरी दुनिया में इसकी मांग बढ़ी है. दरअसल, इस थेरेपी में कोविड मरीजों को रिकवर्ड मरीजों के एंटीबॉडी की प्रचुरता वाले खून से ट्रीट किया जाता है, जिसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं.
लेकिन इंडिया टुडे की जांच ने इस जीवनरक्षक तरल पदार्थ की बढ़ती कालाबाजारी का पर्दाफाश किया है. असल में लोग हताशा में ऐसी कोई भी चीज खरीदने के लिए तैयार हैं जिसमें उन्हें अपने अपने बीमार प्रियजनों का जीवन बचाने की जरा सी भी उम्मीद नजर आती है.
Exclusive: महामारी के बीच प्लाज्मा की ...
प्लाज्मा थेरेपी का अविष्कार 1890 के दशक में डिप्थीरिया को ठीक करने के लिए किया गया था. 1918 की स्पैनिश फ्लू महामारी के दौरान प्लाज्मा थेरेपी ने मृत्यु दर को कम करने में मदद की. दुनिया भर के डॉक्टर अब मध्यम रूप से बीमार कोविड मरीजों के इलाज के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.