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हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुँचने वाली है अशोक गहलोत और सचिन पायलट की तकरार

मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को चुनौती देने वाले सचिन पायलट खेमे के याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है. और 24 जुलाई तक फैसला सुरक्षित रखा है. इसके साथ ही इस दौरान राज्य विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी (Assembly Speaker Joshi) से हाईकोर्ट ने बागी विधायकों पर कारवाई नहीं करने का अनुरोध किया है. इसे पायलट खेमे को मिली फौरी राहत के तौर पर भी देखा जा रहा है. जिसके बाद कोर्ट के फैसले पर मंथन करने मंगलवार देर रात विधानसभा पहुंचे स्पीकर सीपी जोशी ने अब राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मूड बना लिया है.
बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में मीडियाकर्मियों से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि जो हाईकोर्ट में हुआ वो सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के आदेश का उल्लंघन है. राज्य विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि उनके पास नोटिस देने का अधिकार है, जो भी हुआ है वो संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरा है. उन्होंने कहा, ‘नोटिस देने का पूरा अधिकार स्पीकर के पास है. स्पीकर के फ़ैसले के बाद कोर्ट जाया जा सकता है. ये प्रयास संसदीय लोकतंत्र के लिए ख़तरा है. जो हाईकोर्ट में हुआ वो सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के आदेश का उल्लंघन है.’ उन्होंने सवाल किया, ‘मैंने सिर्फ कारण बताओ नोटिस दिया. क्या ये भी मेरा अधिकार नहीं है?’
राजस्थान विधानसभा के मौजूद अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा, ‘आप सभी जानते हैं कि हमारे देश में सब कुछ परिभाषित है. हमारे देश में संसदीय लोकतंत्र है. चुने हुए प्रतिनिधि अपना अपना कर्तव्य निभाते हैं. एक परंपरा के तहत हम अपना काम करते हैं. ‘आया राम गया राम’ के कारण संविधान में संशोधन किया गया था.’
स्पीकर सीपी जोशी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में एक जजमेंट में कहा है कि विधायकों को अयोग्य ठहराने का (disqualification of MLAs) का अधिकार स्पीकर के पास है. ये संवैधानिक बेंच का फ़ैसला था. ऐसे में नोटिस देने का पूरा अधिकार स्पीकर के पास है. स्पीकर के फ़ैसले के बाद कोर्ट जाया जा सकता है.’
विधानसभा स्पीकर ने कहा कि वो इस मामले में हाईकोर्ट के ‘दखल और की जा रही देरी’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. एक निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘मैं न्यायिक और संवैधानिक अथॉरिटी के बीच कोई टकराव नहीं चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को किसी संवैधानिक संकट में बदलने से पहले रोक ले.