Breaking News

हाईकोर्ट के फैसला का गहलोत सरकार पर इफ़ेक्ट, जानें राजस्थान का पूरा सियासी गणित


राजस्थान में जारी सियासी संघर्ष के साथ ही हाई कोर्ट में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बिच अदालती जंग भी जारी है. उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट कैंप ने कांग्रेस के व्हिप प्रमुख की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष के ओर से जारी किये गए नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी है.
स्पीकर की ओर से सचिन पायलट सहित उनके समर्थक विधयाकों को जारी नोटिस में पूछा गया था कि पार्टी का उल्लंघन करते हुए विधायक दल की बैठक में न आने पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा की सदस्यता क्यों न रद्द की जाए. इस नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में बागी विधायकों की दलील है कि विधानसभा सत्र नहीं चल रहा है इसलिए ऐसा नोटिस भेजना विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. यह पार्टी का आंतरिक मामला है. विधायकों की बैठक में न आना विधायकों के ‘फ्रीडम ऑफ़ स्पीच’ (बोलने की स्वतंत्रता ) के अधिकार का हनन है.
इस सब के बिच हाई कोर्ट के फैसले पर सूबे की गहलोत सरकार का मजबूत और कमजोर होना भी टिका है. लेकिन इस राजनीतिक घमासान में विधायकों की संख्या को लेकर जो खींचतान चल रही है. ऐसे में क्या संभावनाएं बन सकती है जिसमें अशोक गहलोत की सरकार के पास ठीक-ठाक बहुमत हो सकता है. आइये समझते है इन पॉइंट्स से:
1. अगर सचिन पायलट सहित 18 बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाती है तो प्रदेश की गहलोत सरकार काफी मजबूत स्थिति में आ जाएगी.
2. मौजूद परिस्थितियों में माना जा रहा है कि अशोक गहलोत के पास 101 विधायकों का समर्थन है. जबकि सचिन पायलट के पास 18 कांग्रेस के बागी और 3 निर्दलीयों का समर्थन है. 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायकों का जादुई आंकड़ा होना जरूरी है.
3. अगर सचिन पायलट सहित बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाती है तो विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 91 पर आ जाएगा. ऐसे में साफ़ है कि गहलोत सरकार बेहद मजबूत स्थिति में आ जाएगी.
4. इसके उलट अगर हाईकोर्ट आज सचिन पायलट के पक्ष में सुनाता है तो अशोक गहलोत की स्थिति विधानसभा में कमजोर हो जाएगी क्योंकि उनके पास 101 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है और बहुमत के लिए भी 101 विधायक चाहिए. ऐसे में अगर एक भी विधायक कम हुआ तो सरकार गिरने का खतरा मंडराने लगेगा.
5. वहीं अगर बीजेपी और उनके समर्थित पार्टियों के 75 और 22 बागी विधायकों को मिला दिया जाए तो 97 विधायक होते हैं उनमें से अगर 2 बीटीपी पार्टियों के जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा भी 99 तक पहुंच जाता है. बीटीपी दो विधायकों वाली पार्टी होने के बावजूद खुद को राजस्थान में किंगमेकर बता रही है.
6. अगर ऐसे हालत बने तो कांग्रेस सरकार के लिए खतरा और बढ़ जाएगा. और एक भी विधायक ने अगर खेमा बदला तो गहलोत सरकार का गिरना तय है.
7. लेकिन इसके बावजूद अगर अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में आ भी गई तो बीजेपी तभी सरकार बना सकती है जब सचिन पायलट सहित उनके 21 विधायक समर्थन दें. दिलचस्प बात ये है कि पायलट अब तक बीजेपी के समर्थन से गहलोत सरकार को गिराने की बात नकारते रहे है. ऐसे में देखना बेहद अहम होगा कि सचिन पायलट का अगला कदम क्या होता है.