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राजस्थान सियासी संकट में हर तरफ से घिरती हुई नजर आ रही है गहलोत सरकार


बहुजन समाज पार्टी बुधवार यानी 29 जुलाई को राजस्थान हाई कोर्ट में पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए सभी 6 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर याचिका दायर करेगी। भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका पर भी सुनवाई होनी है। दिलावर ने अपनी अर्जी में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनकी याचिका को खारिज करने और बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ अपील की है। मामले की सुनवाई जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल की एकलपीठ करेगी।

वहीं, प्रदेश में गहलोत बनाम पायलट से शुरू हुई सियासी उठापटक अब गहलोत बनाम राज्यपाल ज्यादा हो गई है। अशोक गहलोत सरकार 31 जुलाई से ही विधानसभा का सत्र बुलाने पर अड़ी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर पर मंगलवार को ढाई घंटे तक चली कैबिनेट बैठक में राज्यपाल कलराज मिश्र की आपत्तियों पर चर्चा हुई। उसके बाद राज्य सरकार ने अपना जवाब तैयार किया। इस जवाब को राज्यपाल को भेज दिया गया है। राज्य सरकार ने विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर तीसरी बार राज्यपाल के पास अर्जी भेजी है। अब राजभवन के जवाब का इंतजार है।

सचिन पायलट गुट के विधायक भंवर लाल शर्मा ने राजस्थान हाई कोर्ट ने याचिका दाखिल की। उन्होंने मांग की है कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की एफआईआर नंबर 437 की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) से कराई जाए, क्योंकि प्रदेश पुलिस राजस्थान सरकार के प्रभाव में काम कर रही है।

राजस्थान में सियासी संकट के बीच भाजपा विधायक मदन दिलावर ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दायर की। इसमें उन्होंने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमों के बीच जारी रस्साकशी के बीच बसपा ने भी मामले में एक पक्ष बनने के अनुरोध को लेकर अदालत का रूख किया है।