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कोरोना संकट में जहाँ एक ओर कम्पनीयां कर्मचारियों को निकाल रही हैं वहीँ ये कामनी 1 लाख लोगों को रोजगार देनी की तैयारी कर रही है

NewsPoint
नई दिल्ली
कोरोना संकट के समय में भारतीय कपड़ा उद्योग, बैग बनाने वाली समेत कई कंपनियों ने अपने बिजनस मॉडल में तात्कालिक सुधार लाया, जिसका फायदा कंपनी के साथ-साथ देश को भी मिला। वर्तमान में मास्क और पीपीई किट की सबसे ज्यादा डिमांड है। ऐसे में ट्रैवल बैग, यात्रा और फैशन से जुड़े सामान बनाने वाली कंपनी वाइल्डक्राफ्ट अगले 60 दिन में करीब एक लाख लोगों को काम पर रख सकती है।


63 कारखानों के साथ गठजोड़

कोरोना वायरस संकट को देखते हुए कंपनी की योजना निजी सुरक्षा से जुड़े सामानों (पीपीजी) का विनिर्माण और वितरण तेज करने की है। बेंगलुरू की इस कंपनी ने 11 शहरों में 63 कारखानों के साथ गठजोड़ किया है। इससे कंपनी अब तक करीब 30,000 लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार दे चुकी है। इन कारखानों में कंपनी दोबारा उपयोग में आने वाली निजी सुरक्षा किटों (पीपीई) और मुंह पर पहनने वाले मास्क 'सुपरमास्क' का विनिर्माण करा रही है।10 लाख मास्क रोजाना बनाने की क्षमता
कंपनी की 10 लाख मास्क प्रतिदिन बनाने की क्षमता है। कंपनी के सह-संस्थापक गौरव डुबलिश ने कहा, ' कोविड-19 के चलते इन उत्पादों की मांग बढ़ी है, लेकिन कपड़ा उद्योग ने कभी भी स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों का उत्पादन फैशन उत्पाद की श्रेणी में होते नहीं देखा। हमने अपने आप को इस नए स्वरूप में बखूबी ढाल लिया है।'
पीपीजी श्रेणी पर जोर
पीपीजी श्रेणी पर जोर देते हुए डुबलिश ने कहा कि हम कम से कम इस क्षेत्र के लिए तैयार हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने के दृष्टिकोण में हमारा विश्वास है। इस मौके का लाभ उठाते हुए हम आने वाले दिनों में एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने में सक्षम होंगे। आने वाले 60 दिनों में वाइल्डक्राफ्ट प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब एक लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही होगी।