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आखिर ऐसा क्या हुआ था जो लाल बहादुर शास्त्री को अभिनेत्री मीना कुमारी से माफी मांगनी पड़ी थी


 
मीना कुमारी ने अपनी जिंदगी के 33 साल सिनेमा को दिए। साहेब बीवी और गुलाम, पाकीजा, मेरे अपने, आरती, बैजू बावरा, परिणीता, दिल अपना और प्रीत पराई, फुटपाथ, दिल एक मंदिर और काजल जैसी फिल्मों में उनके शानदार अभिनय को हमेशा याद किया जाएगा।
हिंदी सिनेमा के इतिहास में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी जो हरफन मौला कलाकार थीं, पूरी फिल्म इंडस्ट्री में उस दौर में मीना कुमारी जैसा कोई कलाकर नहीं था। कहते हैं जिस फ़िल्म में मीना कुमारी होती थीं उस फिल्म को सफलता का ठप्पा लग जाता था, इतनी शोहरत और ज़बरदस्त सफलता के बाद भी पूरी जिंदगी मीनाकुमारी को प्यार नसीब नहीं हो पाया। अगर ये कहें कि मीनाकुमारी की पूरी ज़िंदगी कहानियों का पूरा महाकाव्य है तो शायद ये कहना गलत नहीं होगा।
फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ट्रेजडी क्वीन कहा जाता है। पर्दे पर राज करने वाली मीना कुमारी को जिंदगीभर प्यार नसीब नहीं हो सका। एक बेहतरीन अभिनेत्री, खूबसूरत गायिका और कवि के रुप में मीना कुमारी को हमेशा याद किया जाएगा। यूं तो उनकी जिंदगी के जुड़े कई किस्से हैं लेकिन इनमें एक बड़ा मशहूर है।

 
हिंदी सिनेमा का वो दौर जब मीना कुमारी का नाम देश में हर किसी की ज़ुबान पर था। लेकिन ऐसे चमकते सितारे को देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री पहचान भी नहीं पाए थे।
वो मीना कुमारी का चमचमता दौर था। हर जुबान पर उनके चर्चे थे। लेकिन बावजूद इसके भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री उन्हें पहचान नहीं पाए। दरअसल मुंबई के एक स्टूडियो में शास्त्री जी को 'पाकीजा' फिल्म की शूटिंग देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से यहां आने का इतना दबाव था कि शास्त्री जी उन्हें ना नहीं कह पाए और स्टूडियो पहुंच गए।
 इस बात का जिक्र कुलदीप नैयर ने अपनी किताब 'On Leaders and Icons: From Jinnah to Modi' में किया है। उन्होंने लिखा है- 'उस वक्त वहां कई बड़े सितारे मौजूद थे। मीना कुमारी ने जैसे ही लाल बहादुर शास्त्री को माला पहनाई। शास्त्री जी ने बड़ी ही विनम्रता से मुझसे पूछा- यह महिला कौन है। मैंने हैरानी जताते हुए उनसे कहा- मीना कुमारी। शास्त्री ने अपनी अज्ञानता व्यक्त की। फिर भी मैंने उनसे सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार करने की अपेक्षा कभी नहीं की थी।'
आगे नैयर लिखते हैं कि, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि शास्त्री जी यह बात पब्लिक में पूछेंगे। हालांकि मैं शास्त्री जी के इस भोलेपन और ईमानदारी से बेहद प्रभावित हुआ था। बाद में लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी स्पीच में मीना कुमारी को संबोधित करते हुए कहा था- मीना कुमारी जी...मुझे माफ करना मैंने आपका नाम पहली दफा सुना है।' हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अभिनेत्री जो उस वक्त देश के लाखों दिलों की धड़कन थी। पहली पंक्ति में स्थिर बैठी थी और शर्मिंदगी का भाव उनके चेहरे पर था।

 
हिंदी सिनेमा के इस चमकते सितारे ने 31 मार्च 1972 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।