मां वैष्णो देवी की गुफा जिसे माता का भवन भी कहा जाता है आज हम आपको इनके बारे में कुछ ऐसे रहस्य बताने जा रहे हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे।
1- वैष्‍णो देवी के दर्शनों करने के ल‌िए वर्तमान समय में ज‌िस रास्ते का इस्तेमाल क‌िया जाता है वह रास्ता गुफा में प्रवेश करने का प्रकृत‌िक रास्ता नहीं है। वैष्णो माता मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस कृत्र‌िम रास्ते का न‌िर्माण सन् 1977 में ‌‌क‌िया गया था। वर्तमान समय में इसी रास्ते से सभी श्रद्धालु माता के दरबार में प्रवेश पाते हैं।
2- इस प‌व‌ित्र गुफा की लंबाई 98 फीट है। इस गुफा में प्रवेश और न‌िकासी के ल‌िए दो कृत्र‌िम रास्तों का निर्माण किया गया है। इस गुफा में एक बड़ा चबूतरा बना हुआ है। इसी चबूतरे पर वैष्णो देवी का आसन है जहां देवी त्र‌िकूटा अपनी माताओं के साथ व‌िराजमान रहती हैं।
3- वैष्णो माता के दरबार में प्राचीन गुफा का काफी महत्व है। ज्यादातर श्रद्धालु इसी गुफा से माता के दर्शन की इच्छा रखते हैं। इसका बड़ा कारण यह भी है क‌ि इस प्राचीन गुफा के समक्ष भैरों बाबा का शरीर मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि माता ने यहीं पर भैंरों बाबा को अपनी त्र‌िशूल से मारा था और उसका श‌िर उड़कर भैरो घाटी में चला गया और शरीर यहीं पर रह गया था।
4- इस प्राचीन गुफा का महत्व इसल‌िए भी है क्योंक‌ि इस पवित्र गुफा में प‌व‌ित्र गंगा जल प्रवाह‌ित होता रहता है। सभी श्रद्धालु इस जल से पव‌ित्र होकर मां के दरबार में प्रवेश करते हैं जो एक अद्भुत अनुभव होता है।
5- वैष्‍णो देवी की इस गुफा का संबंध यात्रा मार्ग मे आने वाले एक पड़ाव से भी है ज‌िसे अर्धकुंवारी कहते हैं। यहां पर एक अन्य गुफा भी है ज‌िसे गर्भजून के नाम से जाना जाता है। माना जाता है क‌ि वैष्णो माता यहां 9 महीने तक उसी प्रकार रही ‌‌‌थी जैसे एक श‌िशु अपनी माता के गर्भ में 9 महीने तक रहता है। इसल‌िए यह गुफा गर्भजून कहलाती है।