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पूजा के सामान में हमेशा शामिल करें ये 4 चीज़ें, होती है बेहद पवित्र, कभी नहीं होती हैं बासी

हमारे धार्मिक ग्रंथों में पूजा के अनेक विधान बताए गए हैं। ईश्वर की पूजा करते समय हमेशा ताजे और पवित्र मिठाई, फूल और फलों का अर्पण ईश्वर को करना चाहिए। परंतु कुछ ऐसी वस्तुएं हैं। जिनका उपयोग भगवान की पूजा में दुबारा किया जा सकता है।

पूजा में यह 4 वस्तुएं हमेशा होती है पवित्र, कभी नहीं होती हैं बासी
 
 
पुराणों के अनुसार यह चीजें कभी बासी नहीं होती है। इनका उपयोग कभी भी पूजा में पिया जा सकता है। आइए हम जानते हैं की ऐसी कौन सी पूजा सामग्री है। जिनका उपयोग आप पूजा में कभी भी कर सकते हैं। आइए हम ऐसी पूजा सामग्रियों के बारे में जानते हैं।
तुलसी के पत्ते

 
 
हमारे धर्म ग्रंथों में उल्लेखित कथाओं के अनुसार तुलसी को भगवान विष्णु की पत्नी माना जाता है। भगवान शिव की पूजा के अलावा बाकी सभी पूजा मे तुलसी के पत्तों आवश्यक होते हैं। भगवान की पूजा अर्चना में तुलसी के पत्तों का अत्याधिक महत्व है। इन पत्तों को धोकर भगवान की पूजा में दोबारा अर्पित कर सकते हैं।
गंगाजल

 
 
भारत मे नदियों को बहुत ही पवित्र माना गया है। इनमें से गंगा नदी को सबसे ज्यादा पवित्र माना गया है। किसी भी प्रकार की पूजा विधि में गंगाजल का विशेष महत्व है। किसी भी देवी देवता की पूजा-आराधना, यज्ञ हवन, यज्ञोपवीत संस्कार और विवाह संस्कार मे गंगाजल का उपयोग होता है।

 
 
हमारे हिंदू धर्म के धर्म ग्रंथों के अनुसार गंगा नदी ब्रह्मा के कमंडल से निकल कर शिव की जटाओं से होते हुए विष्णु भगवान के चरणों को स्पर्श करते हुए पृथ्वीवासियों का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। आपको यह जानकर अत्यधिक आश्चर्य होगा कि यदि गंगाजल सेकडो़ वर्ष पुराना होने के बावजूद कभी भी खराब नहीं होता है।
बेलपत्र

 
 
भगवान शिव शंकर को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र अति आवश्यक है। पुराणों में बेलपत्र को अमर फल कहा गया हैं। यदि आपने बेलपत्र को भगवान भोलेनाथ पर चढ़ा दिया है तो आप उसे धोकर भगवान शंकर पर दोबारा अर्पित कर सकते हैं।
कमल पुष्प

 
 
वैसे तो कमल का पुष्प कीचड़ में खिलता है। परंतु यह पुष्प देवताओं को अति प्रिय है। कुछ विशेष पूजा में कमल पुष्प का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार कमल का पुष्प 5 दिनों तक शुद्व रहता है। कमल के पुष्प का नियमित धोकर 5 दिनों तक पूजा में उपयोग कर सकते हैं ।