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सिंधिया ने बढ़ा दी शिवराज की मुश्किलें अब कैसे सुलझायेंगे इस समस्या को

18 साल तक कोंग्रेस के साथ रहने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी का साथ छोड़ दिया और मध्यप्रदेश में बनी सरकार गिर गई.सिंधिया का कहना था की कांग्रेस अब वो पार्टी नहीं रही जिसके लिये जानी वो जानी जाती थी. सूत्रों का कहना है की मध्य प्रदेश में कांग्रेस दो गुटों में बँटी हुई थी एक में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह थे तो वही सिंधिया समर्थक का अलग मत था.

सिंधिया को साथ लेकर बुरे फसे शिवराज अब कैसे सुलझायेंगे इस समस्या को.
 
 
ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने चहेते तुलसी सिलावट को कांग्रेस सरकार में उप-मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे, लेकिन सत्ता की कमान कमलनाथ के हाथों में होने के चलते यह अरमान पूरा नहीं हो सका. अब मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार में सिंधिया के पसंदीदा अफसर की तैनाती तो उनके मर्जी के जिलों में होने लगी है. वहीं, सिंधिया चाहते हैं कि जो कमलनाथ सरकार में नहीं हुआ, वह शिवराज सरकार में हो जाए और तुलसी सिलावट को शिवराज कैबिनेट में डिप्टी सीएम पद से नवाजा जाए.

 
 
वही कमलनाथ सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ नरोत्तम मिश्रा की भी बेहद अहम भूमिका रही है. इसी के चलते नरोत्तम मिश्रा भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे, लेकिन शिवराज की ताजपोशी के बाद अब कैबिनेट में जगह मिलना तय है. हालांकि, देखने वाली बात यह होगी कि वह डिप्टी सीएम के पद से नवाजे जाएंगे या फिर नहीं है.

 
 
मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार की सत्ता से विदाई की इबारत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखी थी, जिसके चलते छह मंत्रियों समेत 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मध्य प्रदेश में शिवराज को सरकार बनाने का अवसर मिला. अब शिवराज सिंह को भाजपा के विधायक और सिंधिया के विधायक दोनों को खुश रखना होगा, सिंधिया के चहेते को उप मुख्यमंत्री बनाते है तो भाजपा के पुराने साथीयो को शिवराज कैसे समझायेंगे यह उनके लिये अभी समस्या होगी.

 
 
सिंधिया समर्थक बागी मंत्री पुराने महकमों से बेहतर विभाग चाह रहे हैं. सिंधिया अपनी 'पसंद-नापसंद' से बीजेपी को पहले ही 'अवगत' करा चुके हैं. हालांकि यह देखना होगा कि नई परिस्थितियों में तुलसीराम सिलावट को डिप्टी सीएम बनाने में कामयाब रहते हैं या फिर नहीं. फिलहाल शिवराज कह चुके है की कोरोना महामारी के चलते मंत्री मंडल का विस्तार अभी नहीं होगा.